Ramprasad : Brave soldier of Maharana Pratap | रामप्रसाद एक बहादुर हाथी

दोस्तों, पिछले आर्टिकल में हम ने भारत के एक महान वीर सपूत के बारे मे बात की थी जिन्होंने अकबर पसीने छुड़ा दिए थे. महाराणा प्रताप की वीरता के बारे में तो हम सभी ने पढ़ा था और उनके बहादुर घोड़े चेतक के बारे में भी सभी लोगो ने सुना होगा क्योंकि चेतक के उपर बहोत सारी कविताए और आर्टिकल लिख जा चुके हे. लेकिन आज के इस लेख में हम बात करने वाले हे महाराणाप्रताप के एक एसे साथी के बारे में जिसने हल्दी घाटी के युध्ध में बहोत ही अहेम भूमिका निभाई थी. जिसने अकेले ही अकबर की सेना में हाहाकार मचा दिया था. तो चलिए जानते हे वो कोन हे और इसकी वीरता के बारे में.
चलिए जानते हे इसके बारे में विस्तार से.

Ramprasad कोनथा
अकबर की सेना में हाहाकार मचाने वाला यह और कोई नहीं बल्कि एक हाथी था जिसका नाम था रामप्रसाद. यह कोई एसा वेसा हाथी नहीं था बल्कि बहोत ही ताकतवर और समजदार हाथी था जिसका परिचय आपको हल्दीघाटी के युध्ध में मिलता हे. रामप्रसाद भी चेतक की तरह महाराणा प्रताप का खास साथी था.
Ramprasad और महाराणा प्रताप का सबंध
आप सभी ने जाना की रामप्रसाद कोन हे अब बात करते हे उनके और महाराणा प्रताप के सबंध के बारे. रामप्रसाद का अपने मालिक के साथ बहोत ही अनोखा संबंध था. उन दोनो के बिच बहोत ही गहेरी दोस्ती थी और वो महाराणा प्रताप के प्रति पूरी तरह वफादार था जेसेकी हर कोई जानवर अपने मालिक के प्रति वफादार होते हे.
लेकिन रामप्रसाद की स्वामिभक्ति और वफ़ादारी और कोई भी नहीं निभा सकता था. महाराणा प्रताप को वो पूरी तरह से समजता था और उनके सारे व्यू को वो बिना कुछ समजाये कर लेता था जिससे महाराणा प्रताप को लड़ाई में बहोत ही फायदा होता था और इसका उदाहरण Ramprasad ने हल्दीघाटी युध्ध में दिखाया भी हे.

हल्दीघाटी के युध्ध में रामप्रसाद का योगदान
रामप्रसाद हाथी की महानता उसी से पता चलती हे की जब हल्दीघाटी का युध्ध हुआ तो अकबर खुद भी इसके कारनामे देख कर दंग रहेगया था और रामप्रसाद और महाराणा प्रताप इन दोनों को ही वो जीवित पकड़ना चाहता था. इस युध्ध में रामप्रसाद ने अकेले ही अकबर के 13 हाथी को और कई सारे घोड़े को अकेले ही मार दिया था. इसकी सुंठ में 85 किलो की तलवार लगाई जाती थी जिससे वो शत्रुपक्ष की सेना के घोड़े और हाथी को चिर डालता था.
रामप्रसाद की खास बात यह थी की वो बिना महावत के ही अपना काम स्वयम ही कर सकता था. इतना समजदार वो था की उसको कुछ बताने की जरुरत ही नहीं पड़ती . इस लिए अकबर भी इस हाथी से इतना प्रभावित हो गया था की वो इसको अपने लिए चाहता था.
रामप्रसाद की स्वामिभक्ति
जेसेकी हमने बताया की अकबर भी उसको अपने लिए चाहता था इसलिए रामप्रसाद को बंदी बनाने के लिए एक साथ 7 हाथी और 14 महावत को भेज दिया तब जाके बड़ी मुस्किल वो रामप्रसाद को बंदी बना पाया और उसे बंदी बनाकर अपने साथ ले गया.
अब यहाँ पे रामप्रसाद की स्वामिभक्ति देखने को मिलती हे.
पढ़े:- महाराणा प्रताप का इतिहास
अकबर ने रामप्रसाद का नाम बदल के पिरप्रसाद रख दिया और उनके सिपाईओ को बोल दिया की पिरप्रसाद को अच्छा अच्छा खाना खिलाओ और फिर मेरे सामने लेकर आओ. अकबर के सिपाईओ की लगातार कोसिस के बावजूद भी रामप्रसाद ने कुछ भी खाना नहीं खाया. वो हर दिन हर वक्त बहार ही देखता रहेता की महाराणा प्रताप का चहेरा उनको देखने को मिलेगा. अकबर की लगातार कोसिस के बावजूद भी रामप्रसाद ने अपने स्वामी की याद में 28 दिन तक खाना नहीं खाया और आखरी दम तक अपनि वफ़ादारी दिखाते हुए अपने स्वामी को याद करते करते सहीद हो गया.
दोस्तों, आपको यह जानकारी केसी लगी मुझे कमेंट करके जरुर बताये और साथी इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेर करे ताकि उनको भी इस बात के बारे में पता चले.