Why Don’t We Throw Trash in Volcanoes


क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए? Why Don’t We Throw Trash in Volcanoes


दोस्तों आप सभी ने ज्वालामुखी के बारे में जरुर सुना होगा, ज्वालामुखी एक सोए हुए दानव की तरह होता हे. ये दानव जब कभी भी जगता हे आसपास के इलाके में तबाही मचा देता हे. ज्वालामुखी कुदरत की ताकत का एक जानदार नमूना हे जो समय समय पर आग उगलता रहेता हे. अगर कोई भी इन्सान या जिव इस सक्रीय ज्वालामुखी(Volcano) के अन्दर गिर जाये तो कुछ ही सेकन्ड में उस जिव का शरीर हड्डी सहित आग में रूपांतरित हो जायेगा.

अब सवाल ये हे की अगर ज्वालामुखी में इतनी ज्वाला हे तो क्यों न हम हमारी धरती का सारा कचरा उसमे डाल दे? क्यों हम हमारी पृथ्वी पर जमा हुआ कचरा नस्ट करने के लिए ज्वालामुखी का इस्तमाल नहीं करते? क्या कीसी ने कभी एसा करने की कोशिस की हे? अगर कोई एसा करता हे तो क्या हमारे पर्यावरण को कोई हानी पहोंचेगी? क्या एसा करने में कोई खतरा हो सकता हे? इन सभी सवालों के बारे में आपको इस आर्टिकल में बताने वाला हु.

चलिए जानते हे की क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए?

क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए?

हमारा देश हर साल 6 करोड टन से भी ज्यादा कचरा उत्पन्न करता हे. क्या आप जानते हो इस कचरे में से कितना कचरा कलेक्ट हो पता हे? हमारे देश में सिर्फ 60 प्रतिसद कचरा ही कलेक्ट हो पता हे और इनमे से सिर्फ 15 प्रतिसद कचरा ही Processing के लिए पहोंचता हे. बाकि का सारा कचरा हमारे तालाबो, नदियो, मोहल्लो, मैदानों और खेतो में पड़ा रहेता हे जो हमारे सारे जन जीवन को प्रदुसित करता रहेता हे.

लेकिन क्या इस कचरे से छुटकारा पाने का कोई उपाय हे? अगर हम इस बचे हुए सारे कचरे को ज्वालामुखी के अन्दर डाल दे (जो अन्दर आई हुई सारी चीजो को नस्ट कर देता हे) तो हमारा कचरे का प्रोब्लेम भी दूर हो जायेगा. कितना आशान हे ? हे ना? बिलकुल नहीं, अपने सारे कचरे को एक ज्वालामुखी में डालने के लिए सबसे पहेली दिक्कत हे एक सक्रीय ज्वालामुखी (Active Volcano) की तलाश करना.

पूरी दुनिया में सिर्फ 1500 सक्रीय ज्वालामुखी ही हे. और भारतीय उपद्वीप के नजदीक एकलोता सक्रीय ज्वालामुखी अंडबार में बेरिन आइलैंड पर हे. इस ज्वालामुखी तक पुरे देश का कचरा लेकर जाना बिलकुल भी मुमकिन नहीं हे अगर एसा किया भी जाये तो इसमें अरबो रुपये का खर्चा आयेगा.

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दुनिया भर में सक्रीय ज्वालामुखी ढूंढना कोई आशान काम नहीं हे. बड़े बड़े शहर में ज्वालामुखी उस शहर से हजारो मिल दूर हे इसलिए कचरे को वहा तक लेजाने में बहोत ही ज्यादा Transportation Cost आयेगी. अगर किसी भी तरह सारा कचरा उस ज्वालामुखी की तरफ ले भी जाये तो हमें वहा से एसा ज्वालामुखी तलाशना होगा जो इस सारे कचरे को नस्ट कर सके और इसको नाम दिया गया हे शील्ड ज्वालामुखी.

इसको ढूंढना बहोत ही मुश्किल काम हे अगर तलास भी लिया तो इसके आसपास जाने में मोत का खतरा हे. चलिए मान लेते हे की हमें वो शील्ड ज्वालामुखी मिल भी गया. लेकिन अब सवाल आता हे की क्या इसमें कचरा डालना समजदारी की बात होगी या नहीं? क्योंकि ज्वालामुखी के मुख तक जाकर कोन अपनी जान को जोखिम में डाल करा वहा कचरा डालेगा? ज्वालामुखी के आसपास बेहद ही गरम तापमान होर बेहद ही जहरीली गेस निकलती रहेती हे जो इन्सान के लिए मोत का कारन बन सकती हे. और अगर आप इसमें कुछ सामान फेंकते हो तो उसका वातावरण और ज्यादा बिगाड़ जाता हे.

ये है दुनिया की सबसे ठंडी जगह जहा तापमान -100 °C तक नीचे जाता हे

सन 2002 में रिसर्चर की एक टीम ने एक Active Volcano में 30 किलोग्राम कचरे की एक बेग को फेंका था इसका परिणाम बहोत ही भयजनक था. ज्वालामुखी की लहेरे बहोत ही सेंसेटिव होती हे और अगर इसके संपर्क में कोई भी ठंडी चीज आती हे तो वो लहेरे उछलना और विस्फोट करना चालू करदेती हे जीने रोकना असम्भव हे. क्या आप सोच सकते हो ये विस्फोट कितने बड़े हो सकते हे? अगर इस देश का सारा कचरा इस ज्वालामुखी में डाल दिया जाये.(उदहारण के तोर पर एक हवाई ज्वालामुखी में छोटी चट्टाने गिरने पर भी ज्वालामुखी 85 मीटर की ऊंचाई तक हवा में उछला था.) अब क्या आप सोच शकते हे की अगर ये देश का सारा कचरा इसमें डाल दिया जाये तो ये विस्फोट कितने बड़े हो सकते हे?

अब आप खुद ही अंदाज लगा सकते हो की अगर करोडो टन कचरा इस ज्वालामुखी में डाल दिया जाये तो दुनिया का क्या हाल होगा? अगर इसके बाद भी दुनिया के सारे कचरे को ज्वालामुखी में डालने में कामयाब हो भी जाते हे तो भी इस कचरे के जलने से जो Air Pollutionn होगा वो हमारे लिया एक बहोत ही बड़ा चिंता का विषय बन जायेगा. लावा में सभी मटिरियल नस्ट नहीं होते हे एसे में बचे हुए एसे मटेरियल का कचरा ज्वालामुखी के आसपास के वातावरण को बहोत ही बड़ा नुकसान पहोंचायेगा. इसके आलावा इस सारे कचरे को ज्वालामुखी में ट्रान्सफर करने से कई गुना कार्बन भी बढेगा इसकी तो हमने बात भी नहीं की हे.

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तो कचरे को ज्वालामुखी में डाल कर नस्ट करना यह बहोत ही बेकार आईडिया हे. अगर हमें कचरा खत्म ही करना हे तो क्यों न इससे नए नए एनर्जी सोर्स के लिए इस्तमाल किया जाये जेसा की बायोगेस प्लांट में होता हे. भविष्य में कचरे के कारन जो मुश्किले आने वाली हे अगर इसका सामना हमें नहीं करना हे तो आज से हमें कचरे को कम करना होगा और इसका सही जगह पर इस्तमाल करना होगा. गिला और सुका कचरा अलग अलग रखना होगा ताकि रीसायकलिंग में मदद मिल सके.

दोस्तों, आज जिस तरह से हम इन्सान कचरा उत्पन्न कर रहे हे वो हमको भविष्य में बहोत ही तकलीफ देने वाला हे, तो आज से ही हमको प्लास्टिक आदि जो कचरा नस्ट नहीं होता हे एसी चीजो का इस्तमाल कम करदेना चाहिए.


अगर आप मेरी इस बात से सहमत हो तो क्या होगा अगर धरती का सारा कचरा ज्वालामुखी में डाल दिया जाए? आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा Share करे ताकि सभी लोग इसके बारे में जान सके. एसे आर्टिकल को अपने ईमेल में पाने के लिए हमारे इस ब्लॉग को Subscribe करे.

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