अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी

अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी


दोस्तों, आज के दोर पर दुनिया में इतनी तरक्की हो गई हे के मानव का पूरा जीवन ही बदल चूका हे, दुनिया चाँद तक पहोच गई हे, लेकिन फिर भी हमारे भारत में कुछ एसी जाती रहेती हे जिनकी रहेनी करनी एकदम हमारे पूर्वज आदिवासियो की तरह ही हे, वो बिलकुल ही बदले नहीं हे, उनके रीती रिवाज भी बहोत ही अजीब हे, तो आजके इस लेख में में आपको अंडमान द्वीप पर रहेने वाले आदिवासियो के बारे में कुछ एसी जानकारी बताने वाला हु जिसे जानकर आप भी दंग रहेजोगे तो देर किस बात की चलिए जानते हे इस जाती के बारे में .

अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं इस लेख की खास बाते
·        अंडमान-निकोबार का सेंटिनल द्वीप
·        सेंटिनल और जारवा आदिवासी कोन हे
·        सभ्यता और रीती रिवाज
·        जॉन एलेन चाऊ की हत्या
·        सेंटिनल आदिवासी के बारे में रोचक तथ्य
·        जारवा आदिवासी के बारे में रोचक तथ्य

चलिए आपको विस्तार से सारी जानकरी बताता हु.

अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी


अंडमान-निकोबार का सेंटिनल द्वीप
अंडमान निकोबार का सेंटिनल द्वीप भारत के बंगाल में मोजूद हे और घुमने के लिए एक बहोत ही खुबसूरत स्थान हे. यह द्वीप चारो तरफ से समुद्र से घेरा हुआ हे और वहा जाने के लिए बोट या फिर हवाई जहाज से ही जा सकते हे. लेकिन वहा जान खतरों से खली नहीं हे और इसी वजह से हमारी सरकार ने इस द्वीप पर प्रतिबन्ध लगाया हे.

इसी वजह से भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप में मौजूद उत्तरी सेंटिनल द्वीप, दुनिया के लिए आज भी एक रहस्य है और इसे दुनिया के सबसे खतरनाक टापू गिना जाता हे और इसका कारण हे वहा के सेंटिनल आदिवासी जो की बहोत ही खतरनाक हे. वहा के बारे में एक बात प्रचलित हे की जिसने भी वहा जाने की कोसिस की हे वो जिन्दा लोट कर नहीं आया हे.

अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी


सेंटिनल और जारवा आदिवासी कोन हे
सेंटिनल और जारवा जाती के दोनों अलग अलग हे लेकिन दोनो ही आदिवासी भारत के अंडमान द्वीप में रहेते हे. इन लोगो को बाहरी दुनिया से कोई भी लेना देना नहीं हे. इनमे मे सेंटिनल जाती के आदिवासी बेहद ही खतरनाक हे और आज भी पुरानी सभ्यता के साथ ही जीवन जी रहे हे जबकि जारवा जाती के आदिवासी में फ़िलहाल थोडा बहोत सुधार आया हे लेकिन फिर भी वो भी पूरी तरह से जंगली ही हे और खतरनाक भी हे.
बताया जाता हे की अगर उनके इलाके में कोई भी प्रवेस करता हे तो वो लोग उनका स्वागत तीर कमाडं से करते हे चाहे वो लोग उनकी मदद के लिए आये हो तभ भी वो लोग बिना कुछ सोचे समजे हमला करते हे.


अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी


सभ्यता और रीती रिवाज
चलिए अब जानते हे इनलोगों के अजीबो गरीब रीती रिवाजो के बारे में. सेंटिनल जाती के लोग लाल रंग को ज्यादा पसंद करते हे और वे लोग भूतो की पूजा भी करते हे और उनपर यकीन भी करते हे. इसके आलावा वो लोग हिरन का शिकार कभी भी नहीं करते हे और उनको खाते भी नहीं सायद वो हिरन को पवित्र मानते हे .

जारवा जाती में बच्चों के बालिक होने पर इसका नाम बदला जाता हे और इसके लिए अजीबसा रिवाज हे, जो भी बच्चे का नाम बदलने का होता हे इस बच्चे को सुअर का शिकार करके गांव के सभी लोगों को खिलाना होता हे जबकि लडकियो को मिट्टी, सुअर के तेल और गोंद का तिलक लगाने के बाद उनका नाम बदला जाता हे. हे ना अजीब सा रिवाज.

जॉन एलेन चाऊ की हत्या
16 नवंबर 2018 को जॉन एलेन की हत्या का मामला सामने आया था और इस वजह से यह द्वीप एक बार फिर से लोगो के सामने चर्चा में आया था. चलिए जानते हे की क्या हुआ था.
दरसल बात 14 नवंबर की हे जब जॉन ने सेंटिनल द्वीप में घुस ने की कोसिस की थी लेकिन वो कामयाब नहीं हुआ और इस वजह से उसने ठीक 2 दिन बाद फिर से वहा जाने की कोसिस की पर इसबार वो कुछ मछिमार को लेकर गया था. जॉन ने द्वीप से थोड़े दूर अपनी नाव रोकदी और वहा से चल कर द्वीप में घुस गया. जेसे ही उसने वहा कदम रखा सेंटीनेलिस समुदाय के आदिवासियो ने उन पर तीर कमाडं से हमला कर दिया और वही मार गिराया. इसके बाद उनके शव को वो लोग रस्सी से खींचकर ले गए और समुद्र के तट पर गड्डा खोद कर दफना दिया. यह द्रश्य देखकर मछवारे वहा से भाग गए.

अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी


सेंटिनल आदिवासी के बारे में रोचक तथ्य
ü  सेंटिनल जाती के लोग 60000 बर्ष से सेंटिनल द्वीप में रहते हे और आज भी वो पुरानी सभ्यता के साथ ही जीवन जी रहे हे.
ü  सेंटिनल के लोग को खेती के बारे में भी कुछ पता नहीं हे और वो लोग खेती भी नहीं करते हे नातो जानवर पालते हे.
ü  यह लोग फल, शहद, कंदमूल, सूअर, कछुआ और मछली का भोजन करते हे.
ü  इस जाती के लोगो ने आज तक आग को भी देखा नहीं हे और उनको पता भी नहीं हे की आग क्या होती हे.
ü  सेंटिनल जाती के लोग ने आजतक नमक और सक्कर का सेवन नहीं किया हे.
ü  इन समूह का कोई भी मुखिया नहीं होता हे लेकिन तीर-कमांड, जोपडी, टोकरी, और भाला बनाने वाले को सन्मान दिया जाता हे.
ü  यहाँ के लोग अपने बच्चे को तभी से तीर कमांड की शिक्षा देते हे जब वो अपने पेरो पर चलने के काबिल हो जाते हे.
ü  इस जाती एक बहोत ही विचित्र प्रथा हे की अगर किसी की मृत्यु जोपडी में हो जाती हे तो इस जोपडी में कोई भी रहेने नहीं जाता हे.
ü  यह लोग बीमार होने पर सिर्फ जड़ी बुट्टी और पूजा पाठ पर ही निर्भर रहेते हे.

अंडमान के सेंटिनल और जारवा आदिवासी कौन हैं? | अंडमान के आदिवासियो के बारे रोचक जानकारी
ü  सेंटिनल जाती के लोग भुत प्रेत में यकीन करते हे और उनकी पूजा भी करते हे.

जारवा आदिवासी के बारे में रोचक तथ्य
ü  जारवा जाती के आदिवासी 5000 सालो से अंडमान द्वीप में रहेते हे.
ü  इस जाती के बारे में पहली बार सन 1990 में पता चला था. तब तक यह जाती पूरी दुनिया के लिए अनजान थी.
ü  इस जाती के लोग भी तीर कमांड की मदद से शिकार कर के अपना पेट भरते हे. साथ ही यह लोग शहद को पसंदीदा भोजन मानते हे.
ü  फ़िलहाल इस जारवा जाती की संख्या 400 के करीब होने का अंदाजा लगाया जाता हे.
ü  जारवा जाती के यह आदिवासी अंडमान द्वीप में दक्षिण और मध्य द्वीप में रहेते हे.
ü  यहाँ के स्त्री और पुरुष नग्न ही रहते हे. हलाकि कभी कभी वो लोग अपने शरीर को आभूषण और पत्तो की मदद से ढंकते हे .
ü  जारवा जाती के आदिवासी कद में छोटे और रंग में काले होते हे.
ü  अगर इनके बच्चे का रंग थोडा भी गोरा हो तो वहा के लोग यह समजते हे की उनका पिता किसी दुसरे समुदाय के हे और उनकी हत्या करदेते हे.
ü  पुलिस की उनके मामले में दखल करने की इजाजत नहीं हे .