जानिए अनुच्छेद 370 और 35ए के बारे में सबकुछ

पिछले कई दिनों से जम्मू-कश्मीर सारे भारत में चर्चा का मुद्दा बना हुआ था. वेसे तो जम्मू-कश्मीर हमेशा से ही चर्चा में रहेता ही है पर इस बार यह काफी चर्चा में रहा था. 5 अगस्त 2019 को भारत की केंद्र सरकार ने article 370 को हटाकर पुरे देश को आश्चर्य चकित कर दिया क्यूंकि यह मसला पिछले 70 सालो से चला आ रहा था. अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश में जुड़ गए है.

चलिए बात करते है इस आर्टिकल के माध्यम से की आर्टिकल 370 और 35A क्या है.

Article 370 and 35A क्या है? जाने पूरी जानकारी

किस वजह से जम्मू-कश्मीर में article 370 लागु करना पड़ा था
भारत को जब 15 अगस्त 1947 में आजादी मिली थी उसी वक्त जम्मू-कश्मीर भी आजाद हो गया था. उस वक्त राजा हरि सिंह यहाँ के शासक थे और वो इस प्रदेश को आजाद रखना चाहते थे. लेकिन 20 अगस्त 1947 में  पाकिस्तानने कश्मीर पर अपना हक़ जताते हए कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और कश्मीर का कुछ हिस्सा अपने नाम कर लिया जिसको पाकिस्तान ने आजाद कश्मीर का नाम दिया.

जब युद्ध का माहोल छेड गया था इस परिस्थिति में महाराजा हरी सिंह ने जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिए शेख अब्दुल्ला की सहमति से भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नहेरु के साथ मिलकर 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ जम्मू-कश्मीर को अस्थाई विलय की घोषणा कर दी और "Instruments of Accession of Jammu & Kashmir to India" पर अपना हस्ताक्षर कर दिया.

इस नए समजोते के तहत जम्मू-कश्मीर ने भारत को  सिर्फ तिन विषयों रक्षा, विदेशी मामले और संचार को भारत के हवाले कर दिया था. साथ ही केंद सरकार ने यह भी वादा किया था की जम्मू-कश्मीर के लोग स्वयं की संविधान सभा के माध्यम से राज्य की आन्तरिक संविधान सभा का निर्माण कर सकेगे.

इस तरह भारत के संविधान में article 370 लागु कर दिया गया. जिसमे स्पस्ट रूप से कहा गया है की जम्मू-कश्मीर के राज्य के संम्बंध में प्रावधान केवल अस्थाई है. इसको 17 नवम्बर 1952 से लागु किया गया था. और article 370 के तहत article 35A को भी जोड़ा गया था जिसकी वजह से राज्य के लोगो को विशेष अधिकार प्राप्त हुए थे.

चलिए जानते है article 370 जम्मू-कश्मीर के लोगो को क्या सुविधाए देता है?

1. भले ही जम्मू-कश्मीर भारत का ही एक भाग हो पर भारत की केंद्र सरकार इसके नाम, सीमा और क्षेत्रफल को जम्मू-कश्मीर की सरकार की अनुमति के बिना बदल नहीं सकता है.

2. इस आर्टिकल के तहत भारत की सरकार को जम्मू-कश्मीर के मामले में रक्षा, विदेशी मामले और संचार को छोड़ कर बाकि सभी चीजो के लिए वहा की सरकार की permission लेनी पड़ती है.

3. इस समजोते के तहत जम्मू-कश्मीर का अपना खुद का संविधान है और वो भारत के संविधान के तहत अपना काम करने के लिए बंधे हुए नहीं है.

4. जम्मू-कश्मीर भले ही भारत का ही एक राज्य हो पर इसका भी अपना खुद का अलग झंडा है.

5. भारत के लोगो को पूरी आजादी है की वो जहा चाहे अपने देश के किसी भी राज्य के कोने में अपनी संपति खरीद सकते है लेकिन जम्मू-कश्मीर में नहीं.

6. कश्मीर के लोगो को 2 प्रकार की नागरिकता मिली हुई है एक भारत की और दूसरी कश्मीर की.

7. आपको यह बात जरुर चोंकाएगी की यदि कोई भी काश्मीरी महिला भारत के नागरिक से शादी करती है तो इसकी कश्मीरी नागरिकता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी जबकि वही महिला किसी पाकिस्तानी से शादी करती है तो इसकी कश्मीर की नागरिकता पर कोई भी आंच नहीं आएगी.

8. इस आर्टिकल के तहत एक और अजीब कानून बना था की अगर कोई भी पाकिस्तानी लड़का कश्मीर की लड़की से शादी करता है तो उसको भारत की नागरिकता प्राप्त हो जाएगी.

9. Generally एसा होता है की भारत का कोई भी नागरिक भारत को छोड़कर किसी अन्य देश में स्थाई होकर उस देश की नागरिकता को हांसिल कर लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती है. लेकिन यदि कोइ जम्मू-कश्मीर का निवासी पाकिस्तान चला जाता है और वहा स्थाई हो जाता है पर दुबारा जब वो जम्मू-कश्मीर में वापिस आता है तो उसको फिर से भारत की नागरिकता मिल जाती है. ये तो भारत के अन्य नागरिको के साथ खुला अन्याय है.

10. भारत के किसी भी संविधान का असर जम्मू-कश्मीर पर तब तक लागु नहीं किया जा सकता है जब तक रास्ट्रपति उसको लागु करने की अनुमति ना दे.

11. भारत के सविंधान भाग 4 और भाग 4A के तहत भारत के सभी नागरिक को महिलाओ की अस्मिता, गायो की रक्षा और देश के झंडे का सन्मान करना फर्जियात है यदि कोई इसका उल्लघन करता है तो उसको जेल की सजा हो सकती है वही कश्मीर के लोगो पर यह संविधान लागु नहीं होता है यानि की वो महिलाओ, गायो और भारत के झंडे के साथ जो चाहे कर सकते है.

12. इस article के तहत जम्मू-कश्मीर के लोग यदि भारत के झंडे या भारत के राष्ट्रगीत का अपमान करता है तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा.

13. भारत की सरकार जम्मू-कश्मीर पर सिर्फ 2 ही अवस्था में आपतकाल की घोसणा कर सकती है युद्ध और बाहरी आक्रमण.

14. इस आर्टिकल के तहत यदि भारत में कोई आन्तरिक तनाव या घटना के कारन आपातकाल की घोषणा की जाती है तो जम्मू-कश्मीर पर इसका कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा सिर्फ जम्मू-कश्मीर की सरकार को ही यह अधिकार है.

15. इस राज्य में गवर्मेंट जॉब सिर्फ और सिर्फ यहाँ के लोकल नागरिक को ही दी जाती है बहार के कोई भी राज्य के लोगो को नहीं.

इस अभी बातो से यह पता चलता है की सिर्फ कहेने के लिए ही जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है बाकि सभी तरह से वो भारत से अलग है और यहाँ के नागरिक को भारत के नागरिक से विशेष रूप से सुविधाए हांसिल है.

आर्टिकल 35A कब लागु किया गया था

35A को सन 1954 में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद द्वारा article 370 के अंतर्गत जवाहरलाल नहेरु के नेतृत्व वाली सरकार के साथ विचार-विमस करके भारत के संविधान में जोड़ा गया था. 35A को जवाहरलाल नहेरु और जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला के बिच में सन 1952 में हुए "दिल्ली समोझोते" के बाद हुआ था. यह article संविधान में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा सांसद में बिना कोई चर्चा किए लागु कर दिया गया था.

आर्टिकल 35A क्या है.

1. यह article जम्मू-कश्मीर की विधान सभा को स्थाई नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है.

2. इस article के तहत जम्मू-कश्मीर की सरकार जिसको भी नागरिक घोषित करती है सिर्फ वोही वहा पर प्रोपर्टी खरीद सकता है और सरकारी नोकरी प्राप्त कर सकता है.

3. इस आर्टिकल के तहत जम्मू-कश्मीर की महिला भारत के कसी भी राज्य के लड़के से शादी नहीं कर सकती है यदि एसा किया तो वो कश्मीर की नागरिकता खो देती है वही वो पाकिस्तान के किसी भी निवासी से सादी कर सकती है.

4. इस आर्टिकल के तहत बहार के राज्य का कोई भी Student वहा की गवर्मेंट Professional कॉलेज में एडमिशन नहीं ले सकता है और नाही उसको राज्य सरकार द्वारा कोई भी तरह की सरकारी सहायता प्राप्त होगी.

5. इस आर्टिकल को सांसद की अनुमति लिए बिना ही 14 मई 1954 को भारत के संविधान में जोड़ा गया था. इस आर्टिकल को तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति ने संविधान में बिना किसी से चर्चा किए लागु कर दिया था जो नियमो के तहत बिलकुल गलत था. क्यूंकि भारत के संविधान के आर्टिकल 368 के मुताबिक संविधान में कोई भी संसोधन सिर्फ सांसद की मंजूरी के बाद ही लागु किया जा सकता है.

6. इसके आलावा article 35A के कारन जम्मू-कश्मीर के लोगो को वो सभी अधिकार है जो article 370 में मोजूद है.

आर्टिकल 370 और 35A खत्म होने से क्या होगा
जैसा की हम सभी को पता है की आर्टिकल 370 और 35A को जवाहरलाल नहेरु ने भारत के संविधान का उल्लंघन करके लागु कर दिया था जो बिलकुल गलत था. इसी वजह से इसको भी उसी तरह से खत्म किया जा सकता है जिस तरह से 35A को लागु किया गया था. हलाकि अभी भी 370 को पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है पर कुछ हिस्से को छोड़कर बाकि का भाग हटा दिया गया है.

1. इसके चलते अब जम्मू-कश्मीर पर भी भारत का संविधान लागु पड़ेगा और उनको वो सभी पालन करना पड़ेगा जो भारत के अन्य नागरिक को पालन करना पड़ता है. आर्टिकल 370 कए तहत जम्मू-कश्मीर के लोगो को जो विशेष दर्जा मिलता था यह अब पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

2. देश के बाकि राज्य के लोग भी जम्मू-कश्मीर में प्रोपर्टी खरीद सकेंगे.

3. कश्मीर को अब अलग झंडा नहीं दिया जाएगा. यानि की अब वहा भी तिरंगा लहेराया जायेगा और इसके अपमान करने पर वहा के लोगो को भी सजा दी जाएगी.

4. अब वहा पर अलग संविधान लागु नहीं होगे तथा भारत के संविधान को ही मानना पड़ेगा.

5. जम्मू-कश्मीर के लोगो को जो 2 तरह की नागरिकता मिली थो वो अब खत्म हो जाएगी.

6. अब लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है और केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया है.

7. जम्मू-कश्मीर की महिलाए अब भारत के किसी भी राज्य के लोगो के साथ सादी कर सकती है.

8. पूर्व में आर्टिकल 370 को बिना सांसद की अनुमति के ही लागु कर दिया गया था इसी वजह से अब बिना सांसद की अनुमति के ही ख़ारिज भी किया जा सकता है.

9. जम्मू-कश्मीर का कार्यकाल अब 6 साल की जगह 5 साल का हो जाएगा.

10. अब भारत का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में नोकरी कर सकेगा.

कश्मीर के लोग इसका विरोध क्यों कर रहे है  
वहा के लोग को 35A हटने पर यह भय है की यदि एसा होता है तो बहार के राज्य के लोगो को भी यह अधिकार मिल जाएगा की वो जम्मू-कश्मीर में अपनी प्रोपर्टी खरीद सकते है. और साथ ही सरकारी नोकरी और सरकारी कॉलेज में एडमिशन प्राप्त कर सकेंगे. इसके आलावा उनको भी सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप दी जाएगी. इसके आलावा बहार के राज्य के लोग कश्मीर में आकार रहेंगे तो उनकी जन संख्या में भी बदलाव हो जाएगा.

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