हमारे अन्धविश्वास के पीछेका विज्ञान क्या है | Scientific reason behind the Superstition

इन अन्धविश्वासो के पीछे है यह वैज्ञानिक कारन

हमारे अन्धविश्वास के पीछेका विज्ञान क्या है | Scientific reason behind the Superstition

हमारे भारत के ज्यादा तर लोग अंधविश्वास में मानते है. भारत में कई सारे एसे रिवाज प्रचलित है जिसे सिर्फ अन्धविश्वास के नजरिये से ही माना जाता है. इन सभी अन्धविश्वास को हमारे पूर्वजो ने बनाया है जिन्हें हम आज भी दोहरा रहे है. आज के इस आर्टिकल में में आपको कुछ एसे ही अन्धविश्वास के बारे में बताने वाला हु जिसे लोग आज भी मानते है लेकिन इसको देखने का नजरिया विज्ञान की नजर से बिलकुल अलग है.

चलिए एक नजर डालते है आजके आर्टिकल के मुद्दों पर

  1. बिल्ली का रास्ता काटना
  2. सांप को मारने के बाद इसका सिर कुचलना
  3. दरवाजे पर लिंबू-मिर्च लटकाना
  4. रात में नाख़ून नहीं काटना
  5. सोते वक्त उत्तर दिशा की और सिर नहीं होना चाहिए
  6. पीपल के पेड़ की पूजा करना
  7. दही और चीनी खाकर घर से बहार निकलना

इन अन्धविश्वासो के पीछे है यह वैज्ञानिक कारन

हमारे अन्धविश्वास के पीछेका विज्ञान क्या है | Scientific reason behind the Superstition

बिल्ली का रास्ता काटना
यह आम धारणा है की अगर बिल्ली रास्ता काट जाए तो अशुभ होता है इसी धारणा के चलते बहोत सारे लोग आज भी अगर बिल्ली रास्ता काट जाए तो थोड़ी देर के लिए रुक जाते है और कोई वहा से निकालता है तभी हम आगे बढ़ते है ताकि अपसुकन समाप्त हो जाए. चलिए जानते है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारन.

यह रिवाज काफी पुराने समय से प्रचलित है जब देश में बिजली नहीं हुआ करती थी. तब बेलगाडी का इस्तमाल किया जाता था. जब भी कोई रात के समय बेल गाड़ी लेकर निकालता था तब जंगल के रास्ते से कोई जंगली बिल्ली रास्ता पार करती थी तब जो जानवर इस बेलगाडी को चलाता था वो डर जाता था क्यूंकि बिल्लिओ की आंखे रात के अँधेरे में चमकती है. इसके चलते उन बेलगाडियों का बेलेन्स बिगड जाता था. इसी वजह से कोई भी बिल्ली अगर उस टाइम वहा से रास्ता पार करती थी तो गाडियों को वाही रोक दिया जाता था.

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यह ही वजह थी की जंगली बिल्ली के रास्ता काटने पर लोग रुक जाते थे लेकिन आज लोग दिन के उजाले में भी देशी बिल्ली के रास्ता काटने पर भी थोभ जाते है. दरसल बिल्ली की कोई गलती नहीं है गलती हमारी सोच में है.

सांप को मारने के बाद इसका सिर कुचलना
यह प्रथा भी बहोत ही प्रचलित है की अगर किसी इन्सान से गलती से या जान भूजकर साप मर जाता है तो इसका सिर कुचला जाता है, इसके पीछे लोगो को यह अन्धविश्वास है की अगर एसा नहीं किया तो साप को मारने वाले की तस्वीर उसकी आँखों में छाप जाती है जिसके चलते नागिन उस इन्सान को मार डालती है.

दरसल इसके पीछे का लोजिक यह है की जभी साप मार जाता है तभ भी इसके मुख में जहर मोजूद ही रहेता है जो किसी भी को हानि पंहुचा सकता है ईसिस वजह से इसका सिर कुचला जाता है.

हमारे अन्धविश्वास के पीछेका विज्ञान क्या है | Scientific reason behind the Superstition

दरवाजे पर लिंबू-मिर्च लटकाना
लोग यह सोच कर दरवाजे पर लिंबू मिर्ची लटकते है की एसा करने से बुरी आत्मा दूर रहेती है और किसी की नजर नहीं लगती है. लेकिन इसके पीछे का विज्ञान यह है की लिंबू और मिर्ची से सायटिक एसिड होता है जिससे कीड़े मकोड़े दूर रहते है यही वजह है की लिंबू-मिर्ची लगाई जाती है.

रात में नाख़ून नहीं काटना
भारत में यह अंधविश्वास भी बहोत ही लंबे अरसे से चला आ रहा है और लोग आज के इस आधुनिक युग में भी इस बात को मानते है की रात को नाख़ून नहीं काटना चाहिए. अगर एसा किया तो हमारी किस्मत पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है.

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इसके पीछे का लोजिक बहोत ही सिंपल है की पुराने ज़माने में बिजली नहीं हुआ करती थी और नाख़ून को काटने के लिए Nail Cutter भी नहीं था. उस वक्त नाख़ून को काटने के लिए ओजार का इस्तमाल किया जाता था और बिजली ना होने के कारन गलती से ऊँगली न कट जाए इसी वजह से रात को नाख़ून नहीं काटे जाते थे.

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सोते वक्त उत्तर दिशा की और सिर नहीं होना चाहिए
ज्यादा तर लोगो ने इस बात का अनुभव किया ही होगा की अगर जब भी आप उत्तर दिशा की और सिर लेकर सोते है तो आपकी दादी, दादा या किसी भी घरे के बड़े सदस्य ने आपको जरुर टोका होगा की इस तरफ सिर रख कर सोना नहीं चाहिए. हमारे अन्धविश्वास का यह भी एक नमूना है की लोग एसा मानते है की उत्तर दिशा में सोने से अपसुकन होता है. क्यूंकि मृत्यु के समय मुर्दे का सिर उत्तर दिशा की और रखा जाता है.


इसके पीछे का विज्ञान यह कहेता है की हमारे शरीर की चारो तरफ चूमकिय क्षेत्र बना होता है और पृथ्वी के चारो तरफ भी यह चुम्बकीय क्षेत्र बना होता है. एसे में अगर आप अपने सिर को उत्तर की तरफ रख कर सोते हो तो आपका चुम्बकीय क्षेत्र और पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र दोनों आपस में जुड़ जाते है जिससे हमको ब्लडप्रेशर की प्रोब्ले हो सकती है इसके आलावा इसका हमारी पाचन शक्ति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. इसी वजह से आपको उत्तर की और अपना सिर रख कर नहीं सोना चाहिए.

हमारे अन्धविश्वास के पीछेका विज्ञान क्या है | Scientific reason behind the Superstition

पीपल के पेड़ की पूजा करना
लोगो का यह मानना है की पीपल के पेड़ में भगवान का निवास है इसी लिए इसकी पूजा करनी चाहिए. इसमें कोई दोहराई नहीं हे की पेड़ में भी भगवान होते है, यहाँ तक की कण-कण में भगवान का निवास है इसी तरह हर एक पेड़ में भी भगवान का स्थान है तो फिर सिर्फ पीपल के पेड़ की ही पूजा क्यों?

इसके पीछे का कारन यह है की हम सभी जानते है की इन्सान को जीने के लिए ओक्सीजन की जरुरत पड़ती है और वो हमें पेड़-पौधों में से मिलता है लेकिन रात के समय सभी पेड़ उलटी प्रकिया शुरू करते है यानि की ओक्सीजन खुद लेते है और कार्बन डायोक्साइड बहार निकालते है लेकिन सिर्फ पीपल का पेड़ ही एसा है जो रात के समय भी ओक्सीजन ही बहार निकालता है. इसके आलावा पीपल के पेड़ के पत्तो को आयुर्वेदिक Medicines बनाने के लिए इस्तमाल किया जाता है. इसी वजह से सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पीपल के पेड़ की देखभाल लोग करते है.

दही और चीनी खाकर घर से बहार निकलना
यह अंधविश्वास तो भारत के ज्यादातर लोगो में प्रचलित है की अगर कोई भी शुभ काम के लिए बहार निकलते है तो दही और चीनी खाकर जाने से उस काम में सफलता मिलती है. इसके पीछे का वैज्ञानिक कारन यह है की दही खाने से शरीर में ठंडक रहेती है और पेट में गरबडी नहीं होती है जिससे किसी भी काम में दिक्कत ना आ पाए और इसके अन्दर चीनी मिलाने से ग्लूकोज़ की मात्रा शरीर में बनी रहेती है जिससे अशक्ति ना आए और पूरा ध्यान अपने काम पर लगा सके. तो यही वजह है की घर से बहार निकलते वक्त दही खाकर निकलते है लोग.

आज पूरी दुनिया में बहोत सारी तरक्की हो चुकी है लेकिन इन्सान में से अंधविश्वास दूर नहीं हो रहा है इसी वजह से इस आर्टिकल में मैंने आपको कुछ बाते बताई जो ज्यादातर लोग आज भी मानते है. इसके आलावा भी कई साडी एसी बाते है जो आज के दोर पर भी लोग विश्वास करते है.

अगर आपके पास भी इसके आलावा कोई और अन्धविश्वास की बात हो तो हमें कमेंट करके जरुर बताए में कोशिस करुगा की आपको इसके पीछे का वैज्ञानिक तथ्य बता सकू. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसको शेयर जरुर करना.

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