Information and History of Satellite - कृत्रिम उपग्रह के बारे में संपूर्ण जानकारी
Information and History of Satellite - कृत्रिम उपग्रह के बारे में संपूर्ण जानकारी

आज पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ब्रह्मांड में मोजूद सभी ग्रहों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए कृत्रिम उपग्रह भेज रहे है ताकि ज्यादा से ज्यादा जानकारी हमको प्राप्त हो.


इन्सानों द्वारा भेजे गए यह Artificial Satellite चंद्रमा की तरह पृथ्वी की चारो और भ्रमण करते है और पृथ्वी के बारे होने वाले बदलावों की सारी जानकारी वैज्ञानिको तक पहुचाते है जिसको Satellite Communication कहा जाता है.

लेकिन सवाल यह आता है आखिर इन्सान को क्यों जरुरत पड़ी Satellite को भेजने की? इस कृत्रिम उपग्रह से क्या फायदा होता है? सबसे पहेला satellite किसने भेजा था? History of satellite communication क्या है? यह सारी बाते हम आपको इस आर्टिकल में बताने वाले है.

आज का आर्टिकल थोडा लम्बा हो सकता है लेकिन अगर आपको सारी बाते जाननी है तो इसके लिए आपको यह आर्टिकल पूरा पढना पड़ेगा तभी आपको कृत्रिम उपग्रह के इतिहास के बारे में  सारी जानकारी प्राप्त होगी. तो चलिए आर्टिकल की शुरुआत करते है.


Satellite का आविष्कार किसने किया था? - जानिए कृत्रिम उपग्रह का पूरा इतिहास आर्टिकल में कोनसे मुद्दे पर चर्चा होने वाली है?
  1. Artificial Satellite (कृत्रिम उपग्रह) क्या है?
  2. कृत्रिम उपग्रह को क्यों भेजा गया था?
  3. सबसे पहेला Artificial Satellite (कृत्रिम उपग्रह) किसने बनाया था?
  4. Types of satellite-कृत्रिम उपग्रह के प्रकार
  5. What are Satellite used for? Satellite का क्या उपयोग है?
  6. History of Satellite - कृत्रिम उपग्रह का इतिहास
  7. भारत के पास कितने कृत्रिम उपग्रह है?
  8. निष्कर्ष
चलिए अब बात करते है सभी मुदो के बारे में विस्तार से.

Artificial Satellite (कृत्रिम उपग्रह) क्या है?
कृत्रिम उपग्रह एक तरह का मानव निर्मित मिशन है जो चंद्रमा की तरह पृथ्वी की चारो और परिक्रमा करता है और इसके बारे में सारी जानकारिया हमको उपलभ्ध कराता है. इस मिशन को अंतरीक्ष में लौंच किया जाता है जो पृथ्वी के आसपास वाले अंतरीक्ष की सभी Information पृथ्वी तक पहोचाता है इसके आलावा यह धरती के मौसम के बारे में होने वाली हरकत की सारी जानकारिया भी वैज्ञानिको तक पहोचाता है.

कृत्रिम उपग्रह को क्यों भेजा गया था?
जबसे ब्रह्मांड की रचना हुई और धीरे-धीरे करके सारे सौरमंडल का उदभव हुआ और इसके साथ हमारी पृथ्वी की रचना भी हुई. पृथ्वी के निर्माण के बाद जब डायनासोर का काल खत्म हुआ और इन्सानों का जन्म हुआ तभी से लेकर आज तक इन्सान पुरे ब्रह्मांड के बारे जानकारी हांसिल करने में जुड़े है.

अब ब्रह्मांड इतना बड़ा है की इसकी जानकारी हम पृथ्वी पर से तो नहीं कर सकते है इसी वजह से वैज्ञानिको को एसे मिशन की आवस्यकता थी जो अंतरीक्ष में रहेकर अंतरीक्ष और पृथ्वी के बारे में जानकारी धरती पर पहुचाता रहे. इसी कल्पना के तहत कुत्रिम उपग्रह यानि की Artificial Satellite की खोज की गई और उसको अंतरीक्ष में भेजा गया.

सबसे पहेला Artificial Satellite (कृत्रिम उपग्रह) किसने बनाया था?
अंतरीक्ष की ज्यादा से ज्यादा जानकारी के हेतु सबसे पहला  Artificial Satellite बनाया गया. यह कृत्रिम उपग्रह सोवियत संघ द्वारा 4 अक्टूबर 1957 में लौंच किया गया था जिसका नाम था स्पुतनिक 1. इस Satellite को Sergei Korolev (सेर्गेई कोरोलेव) ने डिजाईन किया था.

Types of satellite-कृत्रिम उपग्रह के प्रकार
कृत्रिम उपग्रह के 11 प्रकार है जो इस तरह से है.



1. Anti Satellite Weapons (उपग्रह विरोधी हथियार)
इस उपग्रह को दुश्मन ग्रह, उपग्रह और अन्य अंतरीक्ष पिंड को खोज निकालने के लिए बनाया गया है. इस Satellite के पास सभी तरह के परमाणु हथियार, ऊर्जा हथियार और गति हथियार मोजूद है जो किसी भी परिस्थिति में नजदीक आने वाले पिंड पर हमला कर सकता है.

2. Astronomical Satellite (खगोलीय उपग्रह)
इस उपग्रह को हमारी मंदाकिनी आकाशगंगा के अंतरीक्ष में मोजूद अन्य पिंडो को खोजने के लिए भेजा गया है. यह satellite दूर और बहारी अंतरीक्ष में मोजूद ग्रह का पता लगा सकता है.

3. Bio Satellite (जैवीय उपग्रह)
यह उपग्रह पृथ्वी से वैज्ञानिकों के लिए जीवित जीवो के अवयवो को ले जाने का काम करता है.

4. Communication Satellite (संचार उपग्रह)
Communication Satellite की मदद से हम पृथ्वी पर Live Telecast देख सकते है. यह उपग्रह पृथ्वी के साथ-साथ चारो तरफ घूम कर सभी तरह के तरंगो को लेकर वापस मोड़ता है. फ़िलहाल 2000 से भी ज्यादा satellite हमारे अंतरीक्ष में मोजूद है जो अलग-अलग तरह से हमको सिग्नल पहोचाने का काम करता है. वर्तमान समय में हम GPS यानि की Location का इस्तमाल करते है वो भी Communication Satellite की मदद से ही संभव है.

5. Miniaturized satellite (छोटे उपग्रह)
यह बहोत ही कम वजन वाले उपग्रह होते है जिसका वजन करीब 200 से 500 किलोग्राम के करीब होता है.

6. Navigational Satellite
यह उपग्रह को रेडियो संचार के लिए भेजा गया था. इसकी मदद से मोबाइल की सारी activities संभव बनती है.

7. Reconnaissance satellite (आविक्षण उपग्रह)
इस satellite की मदद से ख़ुफ़िया जानकारी हांसिल कर सकते है. यह एक तरह का Communication Satellite है. इसका उपयोग सैन्य के लिए होता है. सभी देश अपने-अपने अविक्षण उपग्रह की जानकारी ख़ुफ़िया ही रखते है.

8. Earth Observation satellite (पृथ्वी अवलोकन उपग्रह)
जैसे की इसके नाम से ही पता चलता है की इस उपग्रह को पृथ्वी का अवलोकन करने के लिए भेजा गया है. इसी उपग्रह की मदद से हमको पृथ्वी के मौसम के बारे में जानकारी हांसिल होती है. इसी के मदद से नक्शा भी बनाया जाता है.

9. Space Station (अंतरीक्ष स्टेशन)
यह अंतरीक्ष में बनायीं गई एसी जगह है जहा पर मानव निर्मित यान और अंतरीक्ष मानव गुजारा कर सकते है. एक स्पेस स्टेशन अंतरीक्ष यात्रियों के लिए घर ही होता है. अंतरीक्ष स्टेशन के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करे.

10. Tether satellite (टिथर उपग्रह)
यह दुसरे उपग्रह से एक पतले तार से जुड़े हुए होते है.

11. Weather Satellite (मौसम उपग्रह)
वैसे तो मौसम की जानकारी Communication Satellite की मदद से भी मिलती है लेकिन Weather Satellite सिर्फ और सिर्फ मौसम के लिए ही काम करता है और सभी तरह की जनकारी देता है. इसकी मदद से पृथ्वी के जलवायु की खबर हम तक पहोचती है.

What are Satellite used for? Satellite का क्या उपयोग है?
Satellite के उपयोग से हम मौसम की जनकारी, रेडियो, लाइव टेलीकास्ट, location की जानकारी जैसी कई तरह की जनकी हांसिल कर सकते है.

सॅटॅलाइट की बनावट बहोत ही खास तरीके से की गई होती है. उसके उपरी भाग में सोलर प्लेट लगी होती है जिसकी मदद से वो Sun-सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करके अपने आप चार्ज होता रहता है. सॅटॅलाइट में ट्रांसमीटर लगे हुए होते है जिसकी मदद से हम उसको रिमोट से कंट्रोल कर सकते है. अलग-अलग तरह के satellite का कार्य अलग-अलग होता है.

अगर कोई satellite को फोटो खींचने के लिए भेजा गया होगा तो उसके साथ कैमेरा होगा और वो सारी फोंटो खींचकर पृथ्वी पर भेजेगा. उपग्रह की मदद से हम स्कैनिंग भी कर सकते है. इसी satellite की मदद से ही हम एक देश से दुसरे देश में बात कर सकते है इस काम के लिए Communication satellite को भेजा गया है.

इसी तरह हमने ऊपर जो satellite के प्रकार बताए है वो सभी अपना-अपना काम करते है और वैज्ञानिको की सहायता करते है.

History of Satellite - कृत्रिम उपग्रह का इतिहास
अंतरीक्ष के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए स्पुतनिक 1 नामक satellite को सोवियत संघ द्वारा सन 1957 में लौंच किया गया था. इस उपग्रह ने पृथ्वी के वायुमंडलीय के परत्वो के उच्च घनत्व की पहेचान की और इसके रेडियो तरंग पृथ्वी तक पहोचाए.

अब जबकि पहेला कुत्रिम उपग्रह सफल हो गया था तो अमेरिका ने सोचा की वो भी एक कृत्रिम उपग्रह छोड़कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाले. लेकिन जब तक अमेरिका दुसरे उपग्रह के बारे में सोचता तब तक सोवियत संघ ने 3 नवम्बर 1957 को यानिकी सिर्फ 1 ही महीने के भीतर ही दूसरा Satellite लौंच कर दिया जिसका नाम था स्पुतनिक 2. इस बार इस satellite में लैका नामका कुत्ता भेजा गया और यह मिशन भी सफल हो गया.

अब सोवियत संघ की इस तरह की दुगनी सफलता देखकर अमेरिका चुप नहीं बैठ सकता था और इसने भी 31 जनवरी 1958 को एक्स्प्लोरर 1 नामक उपग्रह लौंच किया.

इसके बाद नवम्बर 1967 से ओस्ट्रेलिया ने अपने पहेले उपग्रह को अंतरीक्ष में भेजने के लिए काम शुरू कर दिया. कुछ ही दिनों में ओस्ट्रेलिया अपना पहला satellite लौंच करने में कामयाब रहा. ओस्ट्रेलिया ने नव्मबर 1967 में WRESAT नामक satellite को अंतरीक्ष में सेट कर दिया.

इसके बाद सभी देश अपने अपने कृत्रिम उपग्रह अंतरीक्ष में सेट करने के लिए मैदान में उतर गए लेकिन बहोत ही कम देश इस में कामयाब रहे.

सन 1965 में फ़्रांस ने एस्टेरिक्ष, सन 1970 में जापान ने ओसुमी नामक satellite, सन 1970 में चीन ने डोंग फेंग हांग नामक satellite सफलता पूर्वक भेजा. इसके बाद सन 1971 में UK ने प्रोस्पेरो X - 3, सन 1975 में भारत ने आर्यभट्ट satellite और सन 1988 में इजराइल ने ओफेक 1 नामक satellite को अंतरीक्ष में सेट करने में सफलता हांसिल की.

अब तक अंतरीक्ष में 2 हजार से भी ज्यादा उपग्रह भेजे गए है. भारत ने एक ही रोकेट में 104 satellite भेजकर दुनिया को चकित कर दिया है और एक ही रोकेट में सबसे ज्यादा satellite को भेजने का रेकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है.

भारत के पास कितने कृत्रिम उपग्रह है?
भारत के पास ओक्टोबर 2018 तक करीब 239 satellite थे. सन 1975 से सन 2015 तक भारत के पास सिर्फ 77 उपग्रह ही थे लेकिन 15 फरवरी 2017 को भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रचा. भारत ने इस दिन एक ही रोकेट में एक साथ 104 Satellite भेजकर रसिया का एक साथ एक ही रोकेट में 37 सॅटॅलाइट भेजनेका रिकॉर्ड तोडकर नया इतिहास सर्जदिया.


निष्कर्ष
भारत का चंद्रयान मिशन 2 हाल ही में चन्द्र की ऑर्बिट पर पहोचा था और सिर्फ 30 किलोमीटर की दुरी पर से संपर्क टूट गया था. इसी तरह भारत अपना चंद्रयान मिशन 3 भी बहोत ही जल्दी ही लौंच करेगा. भारत की तरह पूरी दुनिया के वैज्ञानिक पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा के साथ-साथ अन्य ग्रहो के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के लिए अलग-अलग तरह के मिशन भेज रहे है. उम्मीद है हमको आने वाले भविष्य में सौरमंडल के सभी ग्रह के साथ-साथ चन्द्रमा के बारे में भी बहोत ही सचोट जानकारी हांसिल होगी.

आज के इस आर्टिकल में बस इतना ही. अगर आपको Satellite का आविष्कार किसने किया था? Information and History of Satellite - कृत्रिम उपग्रह के बारे में संपूर्ण जानकारी आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसको सभी दोस्तों के साथ शेयर जरुर करना.

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